हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत 'अल-काफ़ी' कितबा से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام جعفر صادق علیهالسلام:
إِنَّ لِصَاحِبِ هَذَا الْأَمْرِ غَیْبَةً، الْمُتَمَسِّکُ فِیهَا بِدِینِهِ کَالْخَارِطِ لِلْقَتَادِ.
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:
"निःसंदेह, इस अम्र (इमामत) के स्वामी के लिए ग़ैबत का एक दौर होगा। इस दौर में जो व्यक्ति अपने धर्म पर दृढ़ता से कायम रहेगा, उसकी मिसाल उस व्यक्ति जैसी है, जो अपने हाथ से कांटेदार पेड़ के कांटे तोड़ रहा हो।"
अल-काफ़ी, भाग 1, पेज 335।
आपकी टिप्पणी